गंगा हमसे करे पुकार....
मेरे देश वासीओं,
तुम पर ही उम्मीद टिकी है
ये उद्योग पती तो होस खो चुके
मुझे मलिन और मैली करते है
साधु-संत अनशन कर मरते है
कोइ ना उनकी सुनने वाला
तुम पर ही आस बंधी है
सरकार ने तो है, मुझे नकारा
मुझसी धरोहर क्यों खोते हो
उठो चलो आह्वान करो और
उन लोगो की संगत लो
जो मुझे बचाने को तत्पर है
पटेल अरूण स्वदेशानुरागी
अभी जंतर मंतर में किया है अब आगे रामलीला में होगा..... अधिक से अधिक संख्या मे पहुंचो
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