Wednesday, February 8, 2012

ऐसे -जैसे

रात को तन्हाई भरे पलो मे मन जब कुच सोचता है
तो उसका चेहरा आखो़ के सामने ऐसे उभरता है
जैसे बाद्लो मे से चा़़द निकलता है,
मेरी रातो कि तन्हाई को इस तरह उडा जाता है
जैसे पानी अपनी रफ़्तार से क़कड बहा ले जाता है
और
बिना कुछ कहे सुने वो चेहरा ऐसे ओझल हो जाता है
जैसे पतझड मे पेडॊ से पत्ते ओर नूर ओझल हो जाता है

इश्क-ए-हाल

कोइ मुझसे पूछे जो गर, इश्क मे क्या हाल बना रखा है
तो कह दू उसे....
याद-ए-दिल, याद-ए-जिगर, याद-ए-तमन्ना लेकर
अपनी वीरान बहारो़ को सजा रखा है//

उनसे मिलने का दिन जो पास है

उनसे मिलने का दिन जो पास है,

ना जाने क्यो़ दिल आज थोडा उदास है,
कुछ पाने का या सब खोने का अहसास है/

उनसे मिलने का दिन जो पास है

दिल थोडा खुश और कहि़ ज्यादा उदास है,
यहि अजीब सि दुविधा अब मेरे पास है/

उनसे मिलने का दिन जो पास है

दोस्तो़ से नहि छिपता न जाने ये कैसा राज है,
दोस्तो़ से घिरे है मगर दिल मे़ उसिके साज है/

उनसे मिलने का दिन जो पास है
शायद प्यार बस यहि एक अहसास है/