दोस्ती है लगाव मिलना बिछड़ना
बिछड़ के फिर मिलना मिलाना
कुछ भी न बोलकर चिड़ाना
कभी कुछ बोलकर चिड़ाना
दोस्ती है साथ खाना खिलाना
खा के उसकी कमियां बताना
किसी को प्यार से खिलाना
तो किसी से खाना बचाना
दोस्ती है साथ गाना गुनगुनाना
गा के फिर मतलब बताना
किसी को गा कर चिड़ाना
फिर उसी को गा कर मनाना
दोस्ती है साथ घूमना घुमाना
रास्ते भर किसी को पकाना
किसी के साथ बेमन जाना
फिर उसी को साथ ले जाना
दोस्ती है साथ यादें बनाना
याद जन्मदिन तक न रखपाना
किसी का अचानक मनाना
तो किसी का कहके मनाना
दोस्ती है बस हक जताना
जो तेरा है उसे अपना बताना
जो खुद का है उसे मेरा बताना
पर काम पड़े तो सब लुटाना
दोस्ती है साथ सपने दिखाना
सपनों में भविष्य बनाना
किसी को ख्वाबों में सजाना
कभी बताना कभी न बताना
माना दोस्ती है रूठ जाना
रूठ कर गलती जताना
मुंह घुमा कर इतराना
पर दोस्ती है अगर तो.... यार मानजाना !!